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सना क़ुरैशी के बारे में
उनकी कहानी
लखनऊ ने मुझे ग़ज़लों से प्यार दिया। मैंने आठ साल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा है और ग़ज़ल की तहज़ीब को ज़िंदा रखने के लिए गाती हूँ।
प्रस्तुतियाँ
मंच से
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5:05ग़ज़ल - आज जाने की ज़िद न करो
मिलते-जुलते प्रतिभागी
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